Sunday, September 21, 2008

मुझको हैरत है...

घास में खेलता है बच्चा, माँ पास बैठी मुस्कुराती है

मुझको हैरत है क्यों दुनिया, काबा-ओ-सोमनाथ जाती है

-निदा फ़ाज़ली

1 comment:

AJAY ANURAG said...

Mujhko koi hairat nahi hai ON YOUR SENSIBLE TEST OF POETRY & GHAZAL. Aise hi apne blog par khubsurat chijen(things) dete rahiye.
Ajay Anurag, New Delhi